Ravan sanhita part-1

नमस्कार दोस्तों आज से हम बात करेंगे रावण संहिता की आसान व अमूल्य बातों की। जिनके ऊपर गौर करने पर आप एक सटीक ज्योतिषी बन सकते है।


ग्रहों के लिंग

पुरुष: सूर्य, मंगल, बृहस्पति

स्त्री: चन्द्र, शुक्र

नपुंसक: बुध, शनि

अन्य: राहु और केतु कुंडली में जिस ग्रह का प्रतिनिधित्व करते है उनके अनुसार ही उनका लिंग जानना चाहिए।(कई लोग उनको भी नपुंसक बताते हैं। जोकि एकदम गलत है।)


ग्रहों का दिन

हम सब सूर्य, चन्द्र, बुध, मंगल तथा अन्य ग्रहों के दिन तो जानते है। किन्तु हमें राहु तथा केतु का दिन ज्ञात नहीं है।

राहु तथा केतु जन्म कुंडली में जिस राशि में हों उस राशि के स्वामी का जो दिन है वहीं राहु– केतु का दिन होता है।उदाहरण स्वरूप यदि किसी कुंडली में राहु धनु राशि में बैठा हो तो राहु का दिन बृस्पतिवार होगा।


ग्रहों के नक्षत्र

सूर्य: कृतिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा

चन्द्र: रोहिणी, हस्त, श्रवण

मंगल: मृगशिरा, चित्र, धनिष्ठा

बुध: अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती

बृहस्पति: पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद

शुक्र: भरणी, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वा आषाढ़

राहु: आर्द्र, स्वाति, शतभाषा

केतु: अश्विनी, मघा, मूल


ग्रहों के यंत्र

सूर्य यंत्र :

चन्द्र यंत्र:

मंगल यंत्र:

बुध यंत्र:

बृहस्पति यंत्र:

शुक्र यंत्र:

शनि यंत्र:

राहु यंत्र:

केतु यंत्र:


ग्रहों के मंत्र

सूर्य- ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः।

चन्द्र- ऊं श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नमः।

मंगल- ऊं क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नमः।

बुध- ऊं ब्रां ब्रों ब्रौं स: बुधाय नमः:।

गुरु- ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नमः।

शुक्र- ऊं द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नमः।

शनि- ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नमः।

राहु- ऊं भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नमः।

केतु- ऊं स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स: केतवे नमः।


यंत्र पर ग्रहों का जाप

  • जो ग्रह नीच का हो तथा अशुभ ग्रहों से अशुभ दृष्ट हो उसके यंत्र पर 21,008 बार जाप करना चाहिए।
  • जो ग्रह नीच का हो उसके यंत्र पर 11,008 बार जाप करना चाहिए।
  • जो ग्रह अशुभ दृष्ट अथवा शत्रु क्षेत्री हो उसे 1,008 बार जाप करना चाहिए।
  • यंत्र का जाप उसके दिन तथा होरा से प्रारम्भ करना चाहिए।
  • राहु व केतु ग्रह के दिन जातक की कुंडली से प्रारंभ करना तथा उस ग्रह में दिन व होरा में जाप प्रारम्भ करना चाहिए।
  • सूर्य, मंगल, बुध, शनि, राहु और केतु के यंत्र चांदी में धारण करने चाहिए।
  • चन्द्र, शुक्र के यंत्र तांबे या सोने में धारण करने चाहिए।
  • बृहस्पति यंत्र तांबे में धारण करना चाहिए।
  • यदि धातु का स्वामी जातक कि कुंडली में नीच का शत्रु क्षेत्री अथवा अशुभ ग्रहों से दृष्ट युक्त हो तो सप्तधातु में धारण करना चाहिए।
  • सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि के यंत्र अं ग्रहों की दिन तथा होरा में धारण करने चाहिए

ग्रहों के रत्न

सूर्य: लाल माणिक्य

चन्द्र: मोती

मंगल: लालमुंगा

बुध: पन्ना

बृहस्पति: पीला पुखराज

शुक्र: हीरा

शनि: नीलम या नीला पुखराज

राहु: गोमेद

  • रत्न का मंत्र जाप कुंडली में ग्रह के बलाबल की परीक्षा 1008 से लेकर 21,008 बार तक आवश्यकता अनुसार करना चाहिए।
  • रत्नों का जाप उसके ग्रहों के दिन होरा से प्रारंभ करना चाहिए।
  • रमल माणिक्य तथा लाल मूंगा सोने अथवा तांबे में, मोती चांदी अथवा कांसे में, पन्ना सोने अथवा कांसे में, हीरा चांदी में, पीला पुखराज सोना अथवा चांदी में, नीलम लोहा अथवा स्टील में, राहु सिसा अथवा सप्त धातु में धारण करना चाहिए।
  • रत्न ग्रहों के स्वामियों के दिन रहा होरा के अनुसार धारण करना उत्तम है।

जय श्री कृष्णा!